है मेरा कर्त्तव्य


दबी आरजू को हौसलों की उड़ान देना, है मेरा कर्त्तव्य ।
बेटा हू हर फर्ज निभाना, है मेरा कर्तव्य ।
पिता की "शान" माँ का “आन” बनना , है मेरा कर्तव्य।
"भ्रातमोह" में ऐसा घिरू, विषम परिस्थितियो में दिवार बनू।
बहन का "त्यौहार ",पत्नी का "धर्म"बनना, है मेरा कर्त्तव्य।
बुजुर्गो की दुआओ, "मासूमियत" के "अथाह" सागर उन "तोतली बोली" का प्यार समेटे चलना,  है मेरा कर्त्तव्य।
"भूखे" को अपनी प्रेमिका,"प्यासे" को अपना मित्र समझना , है मेरा कर्तव्य।
"भानु" जैसा ज्वलन्त रहू, चन्द्र जैसा शीतल,
अन्धेरे में चिराग बन रोशनी करना, है मेरा कर्तव्य।
प्रकति के "अमूल्य "खजाने पर्वत, नदिया, उपवन
रखू इन्हे संजोए, है मेरा कर्तव्य ।
इन्सान ही इन्सान धरा पर ,मरी इन्सानियत जिन्दा रखना, है मेरा कर्तव्य ।       

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