कैसे उससे
कहूं कि मैं उसे वह सबकुछ नहीं दे सकता, जिसकी चाहत वह रखती
है. वह बहुत अच्छी है, सुंदर है. पढ़ी-लिखी है. अच्छे घर से बिलॉन्ग
करती है. और मैं क्या हूं? कैसे उससे बताऊ समझ नहीं आर रहा?
'इतना
आदिल सोच रहा होता है कि, अचानक से रुकसार आ जाती है.'
आदिल तुम
यहां क्या कर रहे हो? रुकसार पूछती है.
कुछ नहीं, थोड़ा सामान खरीदने आया था. तुम यहां कैसे? आदिल ने कहा.
रुकसार-
आज वैलेंटाइन डे है, तुम जानते हो वैलेंटाइन डे क्या होता
है.
आदिल- नहीं
रुकसार-
एक नंबर के बुद्धु हो. वैलेंटाइन डे मतलब प्रेम की अभिव्यक्ति का दिन. यह प्यार का
दिन है. प्यार के इजहार का दिन है. अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए इस
दिन का हर धड़कते हुए दिल को बेसब्री से इंतजार होता है.
आदिल- अच्छा, अच्छा.
रुकसार-
यह अच्छा अच्छा क्या लगा रखा है. चलो किसी अच्छी जगह पर चलते हैं.
आदिल- कहां.
रुकसार-
कहीं भी. चलो मैं ले चलती हूं तुम्हे एक ऐसी जगह जहां तुम आज तक नहीं गए होगे.
ये तुम मुझे
कहां ले आई हो. कोई दिखाई भी नहीं दे रहा है. आदिल ने रुकसार से कहा.
रुकसार ने
जैसे ही आदिल को गले लगाया आदिल समझ गया कि रुकसार उससे क्या कहना चाहती है. आदिल थोड़ी
देर तो रूका रहा, लेकिन कुछ समय बाद रुकसार को अपने
से दूर किया.
दोनों शहर
से कुछ किलोमीटर दूर गंगा किनारे तपती दोपहर में खड़े थे. शायद रुकसार अपने दिल की
बात आदिल से कहने के लिए यहां लाई थी.
देखो, तुम एक अच्छी लड़की हो, अच्छे घर से आती हो, काफी पढ़ी लिखी हो. स्वतंत्र हो. मैं तुम्हारे किसी काम का नहीं. मैं तुम्हारे
लायक नहीं हूं. मैं तुम्हारी कोई ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर पाऊंगा. आदिल ने जितनी बातें अपने दिल में दबा रखी थीं,
सब रुकसार से बोल दी.
रुकसार ने
दोबारा आदिल को गले लगाया और कहा मैं सब जानती हूं. तुम क्या हो. इतना कहते ही रुकसार के आंखों में आंसू आ जाते हैं.
रुकसार के
आंसू आदिल के शर्ट से होती हुई उसके तपते हुए शरीर को चुभती है.
आदिल ने
अपनी जेब से एक चमचमाती हुई अंगूठी निकाली और जैसा कि फिल्मों में होता है, घुटने के बल बैठते हुए रुकसार से कहा आई लव यू. क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
'आदिल यही अंगूठी
खरीदने उस दुकान पर पहुंचा था, जहां रुकसार आ पहुंचती है. आदिल
को पता था कि आज वैलेंटाइन डे है. वह चाहता था कि आज वह अपोने दिल की बात रुकसार से
बोल दे.'
रुकसार- मैं तुम्हें बचपन से जानती हूं. तुम्हारे पूरे परिवार को
जानती हूं. तुम बेहद कमजोर दिल के इंसान हो यह भी जानती हूं. भले कितने ही तकलीफ
में हो, किसी को नहीं बताते. किसी से अपनी दिल की बात बोल भी नहीं सकते, यह भी जानती
हूं. बेहद मेहनती हो. पढ़ाई में भी अच्छे हो, मैं अल्लाह
से दुआ करती हूं कि तुम्हारी जल्द ही अच्छी जॉब लग जाए. यहां आने से पहले उस कार वाले
लड़के-लड़की को देखकर क्या सोच रहे थे,
यह भी जानती हूं. मुझे बड़े-बड़े फूलों का गुलदस्ता नहीं
चाहिए. ये चॉकलेट, गिफ्ट, महंगे रेस्टोरेंट में खाना, फलाना-ढेमाका
कुछ नहीं चाहिए. तुम नेचुरल हो और नेचुरल चीजों से मुझे बहुत प्यार है. तुम मुझे खुश
रख सको, यही मेरे लिए बहुत है. और नहीं भी रख पाए तो भी कोई बात नहीं
मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगी. क्योंकि हम लड़कियां हमेशा लड़कों से ही उम्मीद करती
हैं कि वह हमे खुश रखेंगे. क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. तुम मुझे पसंद हो.
मैं तुम्हारे प्यार को कबूल करती हूं और मैं भी तुमसे शादी करना चाहती हूं.
आदिल इतना सब सुनकर रो पड़ता है. इस बार आदिल रुकसार के गले
ऐसे लिपटा मानों जैसे एक छोटा बच्चा डर की वजह से मां के आंचल में छिप जाता हो.
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