थम जाओ अब, भागा नहीं जाता तुम्हारे पीछे

थम जाओ अब, भागा नहीं जाता तुम्हारे पीछे,

सबकी नजरों  से बचाकर, अब तक करता  रहा पीछा तुम्हारा 

जाने की तुम्हारे खबर से, अब महसूस करने लगा हूं सूनासूना.

कैसे कहूं मुश्किल हो रहा अब चाहतों को छिपाना.

हां रुकना चाहता हूं, जी भर कर निहारना चाहता हूं,

खत्म न हो इतनी बातें करना चाहता हूं, 

रात के सफर का हमसफर होना चाहता हूं, 

तुम्हारे अकेलेपन का साथी होना चाहता हूं

हां तुम्हारे संगीत का धुन होना चाहता हूं,

तुम्हारे खुशी में खुश होना चाहता हूं,

और दुख में दुखी होना चाहता हूं,

लेकिन दिल की बात बोलने से अब भी घबराता हूं.

 तुम्हारी ओर क्यों झुकाव हुआ, ये भी समझ न पाया,

सीधा साधा मैं सांवला, कब बांवला हुआ, समझ न पाया. 

सच है कि तेरी सूरत और सीरत ने ऐसा नशा किया मुझ पर  

कि ख्वाबों मे भी तुम्हारी खुमारी में डूबा रहता हूं.

हां इश्क है तुमसे, चाहता नहीं था बताना.

अब रुक जाओ ना , थाम लो हाथ मेरा. 


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