चलो तब तक दिल की खैर मनाए...


बिछड़ने का वक़्त मत पूछो मेरे रहनुमा। आओ , इस इश्क़-ए-बारिश में हम और तुम बिछड़ने से पहले सारी ख्वाहिशों को जमींदोज करलें।


मैं तुमसे कहती हूं, मैं और ये बारिश तुम्हारे होने से इतना महफूज महसूस करते हैं, जितना चंदा की किरणों से रात का अंधेरा।

तुम मेरी तस्वीर जब जब इस जमीन पर उकेरोगे, यादों की लहर इसे धुलते हुए तुम्हें मेरी याद दिलाएगी।

हां, क्या हुआ जो मैं तुम्हारे गीत की अधूरी लिरिक्स बनकर रह जाऊंगी, क्या हुआ जो तुम्हारे जाने के बाद हर कोई गैर सा लगेगा.

सच है, हम इन लम्हों की साज़िश का हिस्सा हो गए. पर यकीनन मैं परछाई बनकर हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी।

चलो तब तक दिल की खैर मनाए...

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